म्यूचुअल फंड–’सही’ या सिर्फ एक मार्केटिंग जाल? सबसे कड़वा सच! | The BIGGEST Myth About Mutual Funds – Debunked!

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Mutual Fund Sahi Hai: म्युचुअल फंड…? यह बोलते ही हममें से ज्यादातर लोग बोलेंगे …सही हैं! है ना कमाल। आज हम इसी बात को पुरा डिकोड करने जा रहे हैं, कि Mutual Fund क्या वाकई सही है या बस मार्केटिंग करके इमेज ब्रैंडिंग कर दी हैं।

तो आज हम कुछ ऐसी चीजें भी इस आर्टिकल में हम आपको बताने जा रहे हैं जो ना आपको कोई एजेंट बतायेगा ना ही कोई फंड मैनेजर। चलिये देखते हैं क्या म्यूचुअल फंड सही हैं या धोका? क्या SIP Investment सच में फायदेमंद है या धोका?

म्यूचुअल फंड सही हैं

Mutual fund Sahi Hai यह सेंटेंस हमारे दिमाग में छप चुका हैं। मतलब हमारी कंडिशनिंग कर दी गई है की म्यूचुअल फंड सही हैं, लेकिन यह सही तो है लेकिन आपको इसकी दुसरी साईट कोई नहीं बतायेगा।

अगर कुछ साल पहले की बात करो तो Fixed Deposit (FD) सही था लेकिन अब 10-20 साल बाद Mutual Fund सही हैं। मतलब, जादातर लोगों की कंडिशनिंग करी जाती है और आपको इसका पता भी नहीं लगता। लेकिन क्या कोई सर्विस और प्रोडक्ट 100 प्रतिशत सही होता हैं? नहीं! इसीलिए म्यूचुअल फंड की एडवरटाइजिंग में भी आपको आखिर में सब्जेक्ट टु मार्केट रिस्क ऐसे डिस्क्लेमर दिया जाता है जिसे आप ध्यान से कभी सुनते हो।

तो म्यूच्युअल फंड एक तरिके से सही तो है लेकिन यह ग़लत कैसे हैं चलिये यह हम आगे देखते हैं।

म्यूचुअल फंड की एनएवी (NAV)

अगर किसी म्युचुअल फंड मैनेजर ने उसके पुरे फंड को 50 कंपनी के शेयर्स में निवेश करा मतलब एक तरिके से 50 बिजनेसस में निवेश किया और हमे सिर्फ यही लगता है की यह 50 Business या 50 कंपनीया ग्रो करेंगी तो म्यूच्युअल फंड का NAV बढ़ेगा। लेकिन हम यह भुल जाते हैं की वो 50 शेयर्स किस किंमत पर खरिदे हैं और सही में उस बिजनेस की व्हाल्यु क्या हैं। क्या वो खरिदा हुआ प्राइस बिजनेस के व्हाल्यु के ऊपर खरिदा गया है या नीचे? क्या यह देखना महत्त्वपूर्ण नहीं हैं? 

बिजनेस की व्हाल्यु कैसे कैलकुलेट होती है?

एक आप कोई बिजनेस खरिदना चाहते हैं तो आप उसमे उसके एसेट, प्राॅफिट और रेवेन्यू देखोगे ना? उसमें भी आप नेट प्रॉफिट देखोगे जो की After Paying Tax होगा। मतलब आप देखोगे की आप अपना निवेश कितने दिनों में रिकवर कर सकते हो। इसको बोलते हैं PE Ratio (Price to Earning Ratio) जिसके बेस पर हमे पता लगता है की वो बिजनेस ओवरव्हाल्युड हैं या अंडरव्हाल्युड हैं। 

लेकिन अगर हम मानकर भी चलते हैं की इसमें से बहुत-सी बेसीक चींजे फंड मैनेजर देख लेता होगा। लेकिन अगर आपने उस फंड में निवेश किया तो फंड मैनेजर के पास कोई चाॅईस नहीं होती, मतलब अगर आपने इक्विटी फंड में लगाया है तो उसको इन्वेस्ट करना ही पड़ेगा और अगर ओवरऑल मार्केट ही ओवरव्हाल्युड हैं मतलब बिजनेस की व्हाल्यु है 100 रुपये और उसकी किंमत होगी 500 रुपये तब भी वो महंगा हैं। तो यह सब देखने के लिये मॅक्रो विजन चाहिये आपको इसको पुरी तरिके से समझने के लिये। मतलब ‘म्यूचुअल फंड सही है’ तो समझ आता है लेकिन इसका रिस्क क्या है? गलत क्युं हैं? यह भी समझना बहुत महत्वपूर्ण हो जाता हैं।

अगर समझो हमारे देश में कोई बड़ा वित्तीय संकट आता है जो पिछले कुछ सालों में बहुत सारे देशों में आया हैं। अब बहुत सारे लोगों के दिमाग में आयेगा क्रैश आता भी है तो इसमें क्या बड़ी बात है? यह तो पहले भी कई बार आया हैं फिर मार्केट ऊपर उठा भी हैं। तो मैं कहुंगा यह भी आपकी कंडिशनिंग है जो की पिछले नाॅलेज पर बनी हैं। 

मतलब कोविड आया चला गया, साल 2000 में फायनाशियल क्रायसिस आया चला गई। साल 2002 में डाॅटकाॅम बबल आया चला गया, ऐसे ही हमको लग रहा हैं आगे ही आयेगा कुछ तो चला जायेगा। लेकिन अगर कुछ ऐसा हुआ किसी कारण से हम इकोनॉमी फिर से वापिस से ग्रो नहीं कर पाये तो क्या होगा आपके म्युचुअल फंड का? 

एक उदाहरण से समझते हैं, अगर आपने अभी ₹100 निवेश किये हैं और उसकी किंमत ₹50 हो गई तो आप समझोगें मेरा ₹50 का ही नुकसान हुआ हैं लेकिन मानो आपने वहीं ₹100 कहीं और बैंक में या अन्य सुरक्षित जगह लगाये होते तो ₹125 बन जाते मतलब आपके ₹125 का ₹50 हुआ हैं और इसमें इन्फ्लेशन भी तो पकडना पड़ेगा, इसमे इतना आपका नूकसान होगा और अगर यह पिछले मार्केट क्रैश की तरह रिकवर होगा तो ठिक है। लेकिन अगर नहीं हुआ तो आपके ये सही है वाले म्युचुअल फंड क्या ऐसा लिखकर देते हैं? की लाॅस मिनिमम इतना ही होगा? बिल्कुल नहीं, सिर्फ आखिर में बताते हैं ‘सब्जेक्ट टु मार्केट कंडिशन एंड रिस्क’ जो किसी को समझ नहीं आता है और ज्यादातर कोई पढ़ता भी नहीं हैं क्यूंकि सबकी कंडिशन हो गई है की “म्यूचुअल फंड सही हैं”। मानो ऐसे में आपका फंड उसके रिजनेबल व्हाल्यु पर आ भी जाये और वही Stable हो जाये तो ठिक, लेकिन कंडिशन और बिगड़ जाये तो उससे नीचे भी जा सकता है तो ऐसे में पैसा निकलने गये तो मरे, नहीं निकाले तो मरे, ये है असली रिस्क, इसके बारे में कोई बात नहीं करता।

अगर आपको डायवर्सिफाइड निवेश करने के लिये MF में निवेश करना ही है तो आप हमारा म्युचूअल कैसे चुनें? यह वाला आर्टिकल जरुर पढें।

तो अगली बार आप सुने ‘Mutual Fund Sahi Hai’ सुने तो यह सारी बातें याद करना और अपने म्यूचुअल फंड में निवेश करनेवालों मित्रो को भी शेयर करना ताकी वो भी आंखें खोलकर निवेश करना सीखनें।

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FAQ

प्रश्न: म्युचुअल फंड क्या होता हैं?

उत्तर- म्यूच्युअल फंड एक सामुहिक निवेश होता हैं, जहां कई निवेशको का पैसा एकत्रित स्टाॅक, बाॅन्ड और अन्य सिक्युरिटीज में फंड मैनेजर द्वारा निवेश किया जाता हैं।

प्रश्न: क्या म्युचुअल फंड में निवेश करना सुरक्षित है?

उत्तर- म्यूचुअल फंड बाजार जोखिमों के आधिन होता है, लेकिन डायवर्सिफिकेशन और पेशेवर प्रबंधन से इसे कम किया जा सकता हैं।

प्रश्न: म्यूचुअल फंड में निवेश का सही समय कौन-सा होता है?

उत्तर- म्यूच्युअल फंड में निवेश करने का कोई सही समय नहीं होता आपको आर्टिकल में बताये सभी चींजों को परख के खासकर पुरा मार्केट ओवरव्हाल्युड हैं या अंडरव्हाल्युड इस बात का ध्यान रखना चाहिये और अपना सारा निवेश कभी भी एक सेगमेंट अथवा एक एसेट प्रकार मे ना करें उसको डायवर्सिफाइड करें

प्रश्न: म्यूचुअल फंड में क्या टैक्स लगता है?

उत्तर- हां, म्यूचुअल फंड में लाॅग टर्म कैपिटल गेन और शाॅर्ट टर्म कैपिटल गेन जैसे टैक्सेस लगते है।

प्रश्न: क्या म्यूचुअल फंड में गैरेंटी रिटर्न मिलता है?

उत्तर- नहीं, म्यूचुअल फंड किसी भी रिटर्न की कभी गैरेंटी नहीं देता। रिटर्न बाजार और फंड के प्रदर्शन पर निर्भर करते हैं।

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