Nifty 2008 Crash Investors: साल 2008 में 3 दोस्तों ने प्लान किया की हम इस साल निवेश शुरु करेंगे। तीनों ने अपने अपने 5-5 लाख ‘Nifty 50 Index Fund’ में लगायें। तब Nifty 50 ‘6,357’ All time High पर था। सबको लग रहा था Indian Stock Market राॅकेट बन गया हैं।

लेकिन महज 9 महिने के बाद जो हुआ उसने तीनों मित्रों की जिंदगी अलग-अलग कर दी।
वो अक्टुबर की मार्केट की काली रात
अमेरिका में लेहमन ब्रदर्स डुब गया। पुरी दुनिया में Financial System हिल गया था। तब 8 जनवरी 2008 को निफ्टी 6,357 अपने ऑल टाइम हाई पर था। 27 अक्टूबर 2008 को यह गिरकर 2,252 पर आ गया, यह peak से 65% की गिरावट थी।
तीनों दोस्तों का अब 5 लाख रुपयों का निवेश ₹1.75 लाख रुपये रह गया।
तब टिवी पर एक्सपर्ट बोल रहे थे- भारत का मार्केट अब 10 साल नहीं उठेगा। बचा हुआ पैसा निकाल लो।
सुरेश, रमेश और महेश की कहानी!
रमेश – जो पर गया
रमेश इस बड़ी गिरावट से बहुत चिंतित था। जब भी सुबह उठता अपना Portfolio देखता और हर बार और लाल दिखाती देता।
अक्टूबर 2008 को में उसने फैसला कर लिया की बस हो गया, और नहीं झेलना!
अब उसने सब बेच दिया! 1 लाख 75 हजार हाथ में आए।
उसका ₹3.25 लाख का नुक़सान पर्मनेंट के लिये लाॅक हो गया।
उसने कसम खाई- ‘अब मैं कभी मार्केट में पैसे नहीं लगाऊंगा। FD सही हैं।’
सुरेश – जो रुका
सुरेश को भी डर लगा। लेकिन उसने एक काम किया- उसने अपना portfolio ऐप डिलिट कर दिया। रोज देखना बंद किया।
सुरेश ने सीधे ₹5,000 की monthly SIP जारी रखी। हर महीने पैसा कटता रहा।
जब Nifty 2,252 पर था- सुरेश को सस्ते में units मिल रहे थे। उसे तब पता नहीं था- यही उसकी सबसे बड़ी कमाई थी।
सुरेश के जैसे जिन investors ने January 2008 में SIP शुरू की और जारी रखी — उनकी SIP सिर्फ 18 महीने में break even हो गई।
महेश – जो गिरावट में खरीदा
महेश बाकी दोनों से थोड़ा अलग था। उसने Warren Buffett का एक quote पढ़ा था-
“जब सब डरें तो लालची बनो।”
उसके पास ₹2 लाख एक्स्ट्रा थे। अक्टूबर 2008 में – जब सब बेच रहे थे — महेश ने और खरीदना शुरु करि।
घरवालों ने कहा पागल है। दोस्तों ने कहा डूब जाएगा।
महेशने किसी पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया वह रुका रहा।
2014 में – 6 साल बाद
साल 2008 की बडी गिरावट के बाद 2009 मे Nifty ने 76% की तेज recovery की। और साल 2013-14 तक Nifty ने अपना 2008 वाला हाई वापस पार कर लिया।
तीनों दोस्तों मिले- उनके नतिजे देखो
| रमेश | सुरेश | महेश | |
January 2008 में | ₹5 लाख लगाए | ₹5 लाख लगाए | ₹5 लाख लगाए+₹2 लाख एक्स्ट्रा |
| October 2008 में | घबराकर बेचा | SIP जारी रखी | और खरीदा |
| हाथ में क्या था | ₹1.75 लाख | invested रहा | Invested रहा |
| 2014 तक | ₹1.75 लाख FD में | ₹12-13 लाख | ₹22-25 लाख |
रमेश,सुरेश और महेश तीनों ने same market देखा। फर्क सिर्फ एक फैसले का था।
रमेश की असली गलती क्या थी?
रमेश बुरा इंसान नहीं था। गलत नहीं था।
बस Human था।
हमारा दिमाग लाॅस से इतना डरता है कि सही वक्त पर सही फैसला लेना Impossible लगता है। इसे Psychology में “Loss Aversion” कहते हैं।
2008 के Peak पर Lumpsum Investment (एकमुश्त राशि) 5-6 साल तक घाटे में रही – लेकिन 7वें साल में positive हो गई।
रमेश बस 7 साल नहीं रुक पाया।
यह भी पढें: SIP vs Lumpsum
अगला कदम तुम्हारा
अगर तुम सही में एकक्ष Long Term Investor बनना चाहते हो तो दो काम करो:
यह किताब पढ़ो:
“The Psychology of Money” – यह किताब बताती है कि रमेश जैसी गलती क्यों होती है और कैसे बचें।
आज ही शुरू करो:
Angel One पर फ्रि में अपना डिमैट खाता खोलो और ₹500 से ‘Nifty 50 Index Fund’ में SIP शुरू करो। रमेश मत बनो।
अगली बार जब market गिरे और घबराहट हो – एक सवाल पूछना खुद से:
“मैं रमेश बनूंगा, सुरेश बनूंगा, या महेश?”
Disclaimer- यह आर्टिकल सिर्फ एज्युकेशन एवं जानकारी के लिये लिखा हैं। हम कोई सेबी रजिस्टरी एडवायजरी नहीं हैं। हम कोई भी निवेश करने की सलाह नहीं देते हैं। मार्केट में निवेश जोखिमभरा हो सकता हैं। कृपया कोई भी निवेश करने से पहले आप अपने वित्तीय सलाहकार की राय अवश्य करें।
अक्सर पुछे जानेवाले सवाल (FAQ)
प्रश्न: क्या 2008 जैसा crash फिर आएगा?
उत्तर- हो सकता हैं, तेजी और गिरावट मार्केट सायकल का पार्ट हैं। लेकिन तुम पैनिक मत करें, Patient रहो। अगली क्रैश में आप भी महेश बनो ना की रमेश।
प्रश्न: मुझे सुरेश जैसा बनना है या महेश जैसा — दोनों में फर्क क्या है?
उत्तर- दोनों ही अपनी- अपनी जगह सही हैं। इस स्टोरी में सुरेश Consistent, Disciplined, Patient हैं वहीं महेश Aggressive, Contrarian, Confident हैं। दोनों ही profitable हैं इसलिए आप अपनी Financial Situation के हिसाब से choose करो की आपको महेश जैसा निवेश करना है या सुरेश जैसा।
प्रश्न: मुझे अगर निवेश की शुरवात करनी है तो कोनसी ऐसी बुक हैं जिसे मुझे सबसे पहले पढ़ना बढिया रहेगा?
उत्तर- अगर मेरी मानो तो ‘बेबिलोन का सबसे अमीर आदमी’ यह किताब मेरे हिसाब से सबसे बढिया शुरवात होगी। यह किताब लिखे बहुत साल बीत चुके हैं लेकिन इनमें बताये गई फंडामेंटल बातें आज के जमाने भी उतनी ही कारगार हैं। यह किताब मैंने पुरी पढ़ी है और यह मेरी सबसे पसंदिदा किताबें से एक हैं।
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