दुनिया की सबसे Undervalued Asset – चाँदी का असली वक्त अब आ रहा है? जाने एक्सपर्ट टारगेट

By Nishant Patil

Published on:

इस साल के शुरवात में चांदी बहुत ज्यादा उछाल देखने को मिला था। उसकी किंमते मानो आसमान छु रही थी लेकिन बाद में इसमें हमें गिरावट देखने को मिला था। अगर जनवरी की बात करें तो चांदी की किंमते १२१.६४ डॉलर तक पहुंच गई थी पर बाद में वही भाव ४३ प्रतिशत क्रैश कर गया। अब सवाल से की चांदी का भाव अब आगे चढ़ेगा या गिरेगा? चलिये जानते है क्या कुछ हो सकता है और उसके पिछे कारण क्या-क्या हैं?

फिर से चांदी में देखी गई तेजी

दरअसल, १२ जून को चांदी की किंमतो में देश के साथ विदेशों में तेजी देखने को मिली हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में भाव ०.६३ फीसदी चढ़कर ६७ डॉलर प्रति औंस तक पहुंच गया। उधर भारत के कमोडिटी एक्सचेंज एमसीएक्स पर सिल्वर फ्युचर २.९ फिसदी चढ़कर २,४६,६०४ रुपये प्रति किलो पर बंद हुआ। इस तेजी के बावजूद यह पांचवां हफ्ता है जहां पर हमें सिल्वर में गिरावट देखने को मिली हैं‌।

९० डॉलर तक जा सकता है भाव

एक्सपर्ट का कहना है की आगे सिल्वर की किंमतो में काफी तेजी देखने को मिल सकती हैं। रायटर्स के पोल में सिल्वर को एक्सपर्ट ने ७९.५० तक का टारगेट दिया हैं। वहीं काॅमर्ज बैंक ने इसपर ९० डॉलर प्रति औंस तक जाने के टारगेट दिये हैं। इतना ही नहीं जेपी मॉर्गन ने तो इस साल चांदी के भाव ८५ डॉलर तक जाने का टारगेट बताया हैं वहीं बैंक ऑफ अमेरिका ने चांदी में ८६ डॉलर प्रति औंस का टारगेट दिया हैं। 

यह भी पढें: डिजिटल सिल्वर खरीदना बड़ी गलती तो नही? निवेश से पहले ये सच जरूर जान लें

चांदी की इंडस्ट्रीयल डिमांड स्ट्राॅग

एक्सपर्ट का कहना है की सोने और चांदी को जो एक बात अलग करती है वो है इंडस्ट्रीयल डिमांड। सोने की डिमांड उसके सुरक्षित निवेश के लिये की जाती है वहीं अब चांदी में इन्वेस्टमेंट के साथ इंडस्ट्रीयल डिमांड के लिये यह अभी ज्यादा चर्चा में हैं। दुनियाभर में इंडस्ट्रीयल इस्तमाल में चांदी की मांग काफी जादा बढ़ी हैं। इस वजह से पहले जैसा अब चांदी का भाव नहीं रहेगा। 

अगर आपको चांदी को पुरे डेप्थ में समझना है तो आप हमारा ‘चांदी- भविष्य का सोना’ यह आर्टिकल पढ़ सकते हैं आपको Silver Price का सारा खेल रहा समझ आ जायेगा।

सप्लाई कम और डिमांड जादा

दुनियाभर में आप देखेंगे तो इलेक्ट्रानिक्स, सोलर पैनल और मेडिकल इक्युपमेंट में सिल्वर का इस्तेमाल बहुत ज्यादा हो रहा हैं। एक अनुमान के मुताबिक साल २०२६ के मुकाबले करिब ६.७ करोड़ औंस कम आ रहा हैं। यह लगातार छटा साल है जहां चांदी की डिमांड सप्लाई से कई जादा हो चुकी हैं। लेकिन होने से तुलना करो तो चांदी में बहुत जादा उतार चढ़ाव दिखता हैं। इसके बावजूद बढ़ती इंडस्ट्रीयल डिमांड इसकी किंमते गिरने से रोकती हैं।

Disclaimer-  यह आर्टिकल सिर्फ एज्युकेशन एवं जानकारी के लिये लिखा हैं। हम कोई सेबी रजिस्टरी एडवायजरी नहीं हैं। हम कोई भी निवेश करने की सलाह नहीं देते हैं। मार्केट में निवेश जोखिमभरा हो सकता हैं। कृपया कोई भी निवेश करने से पहले आप अपने वित्तीय सलाहकार की राय अवश्य करें।

HomepageClick Here

यह भी पढें

सोना या चांदी? Silver को नजरअंदाज करना 2026 में पड़ सकता है भारी

फिजिकल बनाम सिल्वर ईटीएफ