EPFO New Rule: प्राइवेट सेक्टर में काम करने वाले करीब 8 करोड़ कर्मचारियों के लिए यह एक अहम खबर है। कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) ने PF से जुड़े नियमों में बड़ा बदलाव किया है। नए नियम के मुताबिक अब सिर्फ 15,000 रुपये की तय सैलरी सीमा पर 12% योगदान देना अनिवार्य होगा, जो महीने का 1,800 रुपये बनता है। इससे ज्यादा जो भी रकम PF में डाली जाएगी, उसे स्वैच्छिक माना जाएगा।

अगर सैलरी 1 लाख है तो कितना कटेगा?
मान लीजिए आपकी बेसिक सैलरी महीने की 1 लाख रुपये है। ऐसे में भी आपके PF खाते में अनिवार्य रूप से सिर्फ 1,800 रुपये ही कटेंगे, और कंपनी भी उतनी ही रकम अपनी तरफ से जमा करेगी। हालाँकि, अगर आप चाहें तो अपनी बाकी सैलरी में से कुछ हिस्सा रिटायरमेंट सेविंग के तौर पर अतिरिक्त रूप से PF में डाल सकते हैं, यह पूरी तरह आपकी मर्जी पर निर्भर करेगा।
इस बदलाव का फायदा क्या होगा?
एक अधिकारी के मुताबिक, यह लचीलापन इसलिए लाया गया है ताकि कर्मचारियों को अपनी रिटायरमेंट बचत पर ज्यादा नियंत्रण मिल सके। यह बदलाव नए लेबर कोड के हिसाब से किया गया है। चूँकि प्राइवेट सेक्टर में ज्यादातर सैलरी CTC (Cost to Company) मॉडल पर आधारित होती है, इसलिए अब सैलरी स्ट्रक्चर को इस तरह बनाया जा सकेगा जिससे कर्मचारी और कंपनी दोनों को फायदा मिले। हालाँकि, PF में शामिल होने की अनिवार्यता वाले नियमों में कोई बदलाव नहीं किया गया है।
पहले क्या थे नियम?
पुरानी EPF योजना (1952) के तहत, 15,000 रुपये की सैलरी सीमा सिर्फ यह तय करने के लिए थी कि किसी कर्मचारी को अनिवार्य रूप से PF में शामिल होना है या नहीं। जिनकी बेसिक सैलरी 15,000 रुपये तक थी, उनके लिए PF से जुड़ना जरूरी था। बाकी लोगों के पास इसमें शामिल होने या न होने का विकल्प था।
एक बार योजना से जुड़ने के बाद कर्मचारी अपनी पूरी बेसिक सैलरी पर योगदान देते थे, और कंपनी को भी उतना ही हिस्सा देना पड़ता था, भले ही यह तय सीमा से कहीं ज्यादा हो। यह 15,000 रुपये की सीमा 2014 में तय की गई थी। उसी साल पेंशन योजना (EPS) में बदलाव करके कंपनी के 8.33% योगदान को भी 15,000 रुपये तक सीमित कर दिया गया था, यानी अधिकतम 1,250 रुपये महीना। चूँकि योगदान असली सैलरी पर आधारित होता था, इसलिए बाकी बचा पैसा कर्मचारी के PF खाते में जमा हो जाता था।
अब पैसा निकालना कितना आसान होगा?
नई योजना में PF से पैसा निकालने के नियम भी काफी आसान बना दिए गए हैं। पहले जहाँ निकासी की 13 अलग-अलग वजहें थीं, अब उन्हें घटाकर सिर्फ 3 कैटेगरी में रखा गया है, जरूरी, घर, और विशेष हालात। विशेष हालातों में सदस्य अपने PF खाते का 100% तक एलिजिबल बैलेंस निकाल सकते हैं, जिसमें कर्मचारी और कंपनी दोनों का हिस्सा शामिल होगा। हालाँकि खाते में हमेशा कम से कम 25% बैलेंस बचाकर रखना जरूरी होगा।
हमारी राय
कुल मिलाकर देखें तो EPFO का यह नया कदम कर्मचारियों के हित में उठाया गया एक अहम फैसला माना जा सकता है। खासकर उन कर्मचारियों के लिए जिनकी सैलरी ज्यादा है, यह बदलाव उन्हें हर महीने ज्यादा टेक-होम सैलरी का विकल्प देता है। हालाँकि, यहाँ यह समझना भी जरूरी है कि PF सिर्फ एक टैक्स-सेविंग साधन नहीं, बल्कि रिटायरमेंट की सबसे भरोसेमंद बचत योजनाओं में से एक है। इसलिए अगर आपकी सैलरी ज्यादा है और आप लंबी अवधि में एक मजबूत रिटायरमेंट फंड बनाना चाहते हैं, तो सिर्फ अनिवार्य 1,800 रुपये पर निर्भर रहने के बजाय, स्वैच्छिक रूप से ज्यादा योगदान करने के विकल्प पर भी गंभीरता से विचार करना चाहिए।
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