पार्ले-जी बनाने वाली कंपनी लाएगी 1 लाख करोड़ का IPO, जानें पूरी डिटेल | Parle-G IPO News in Hindi

By Nishant Patil

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Parle-G बिस्किट बनाने वाली मशहूर कंपनी Parle Products अब शेयर बाजार में उतरने की तैयारी कर रही है। सूत्रों की मानें तो कंपनी अगले साल एक बहुत बड़ा आईपीओ (Initial Public Offering) लॉन्च कर सकती है। इस खबर से बिस्किट इंडस्ट्री और शेयर बाजार दोनों में हलचल मच गई है।

कितना बड़ा हो सकता है IPO?

जानकारी के अनुसार, यह IPO 1 अरब डॉलर यानी करीब 9,530 करोड़ रुपये से भी ज्यादा का हो सकता है। कंपनी अपनी कुल वैल्यू 10.5 अरब डॉलर यानी लगभग 1 लाख करोड़ रुपये तक आंक रही है। हालांकि यह आंकड़ा आगे बाजार की स्थिति के हिसाब से घट-बढ़ भी सकता है। अभी यह पूरा मामला शुरुआती स्टेज में है और कंपनी ने इस पर कोई अंतिम मुहर नहीं लगाई है।

IPO संभालने के लिए किन बैंकों को चुना गया?

खबर है कि Parle Products ने इस साल अप्रैल में बैंकों से प्रस्ताव मांगे थे। इसके बाद कई बड़े इन्वेस्टमेंट बैंकों ने अपनी योजनाएं कंपनी के सामने रखीं। अभी तक कंपनी ने तीन नाम फाइनल किए हैं:

– Kotak Mahindra Capital

– Axis Capital

– HSBC Securities

सूत्रों का यह भी कहना है कि कंपनी एक और यानी चौथे बैंक को भी इस टीम में शामिल करने पर विचार कर रही है। इस पर बातचीत अभी चल रही है।

कंपनी ने इस पर क्या जवाब दिया?

जब इस बारे में Parle Products से पूछा गया, तो कंपनी के चीफ मार्केटिंग ऑफिसर मयंक शाह ने साफ कहा कि वे बाजार में चल रही किसी भी अटकल पर कमेंट नहीं करते। उन्होंने बताया कि कंपनी का पूरा ध्यान फिलहाल अपने बिजनेस को आगे बढ़ाने पर है, और हर बड़ी कंपनी की तरह वे भी ग्रोथ के नए रास्ते तलाशते रहते हैं। वहीं Kotak और Axis Capital ने इस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी, जबकि HSBC ने भी टिप्पणी करने से मना कर दिया।

Parle Products और Parle Agro अलग-अलग कंपनियां हैं

बहुत लोग Parle Products को Parle Agro समझ लेते हैं, लेकिन दोनों बिल्कुल अलग कंपनियां हैं। Parle Products की कमान विजय चौहान के हाथ में है, जबकि Parle Agro को जयंतीलाल चौहान का परिवार चलाता है, जो Frooti, Appy Fizz और Bailley जैसे ड्रिंक ब्रांड बनाती है। यह बंटवारा परिवार में हुए बंटवारे के बाद हुआ था, और तब से दोनों कंपनियां अपने-अपने तरीके से काम कर रही हैं।

मार्केट में कंपनी का मुकाबला किससे है?

बिस्किट और स्नैक्स की दुनिया में Parle Products का मुकाबला कई बड़े नामों से है, जैसे:

– Britannia

– ITC (Sunfeast)

– Mondelez India

– Perfetti

– Priya Gold

– Anmol Industries

– Cremica

Hurun India की 2025 की रिपोर्ट के मुताबिक, बिना लिस्टेड कंपनियों में Parle Products की वैल्यू करीब 75,420 करोड़ रुपये आंकी गई थी, जिससे यह भारत की सातवीं सबसे मूल्यवान अनलिस्टेड कंपनी बनी।

पहले कंपनी ने IPO से किया था इनकार

बीते मई महीने में जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी को Melody टॉफी भेंट की थी, तो वह वीडियो खूब वायरल हुआ था। उस समय CMO मयंक शाह ने कहा था कि इससे भारतीय ब्रांड को दुनियाभर में पहचान मिलेगी। उसी बातचीत में जब उनसे IPO को लेकर सवाल पूछा गया, तो उन्होंने साफ कहा था कि कंपनी फिलहाल लिस्टिंग की कोई योजना नहीं बना रही और लंबे समय से प्राइवेट लिमिटेड कंपनी के तौर पर ही आगे बढ़ने का इरादा रखती है।

कितनी पुरानी और कितनी बड़ी है कंपनी?

Parle Products की शुरुआत साल 1929 में हुई थी और इसका हेडक्वार्टर मुंबई के विले पार्ले इलाके में है। Parle-G के अलावा कंपनी के पास कई और लोकप्रिय ब्रांड हैं, जैसे KrackJack, Monaco, Hide & Seek और Poppins।

वित्त वर्ष 2024-25 के आंकड़ों की बात करें तो कंपनी का ऑपरेशनल रेवेन्यू 8.5% बढ़कर 15,568.49 करोड़ रुपये तक पहुंच गया। हालांकि इसी दौरान मुनाफे में 39% की गिरावट आई और यह घटकर 979.53 करोड़ रुपये रह गया।

कंपनी सिर्फ बिस्किट और कन्फेक्शनरी तक सीमित नहीं है, बल्कि केक, रस्क, आटा और ब्रेकफास्ट सीरियल जैसे प्रोडक्ट्स भी बनाती है। इसके प्रोडक्ट्स अमेरिका, ब्रिटेन, कनाडा, न्यूजीलैंड और मध्य-पूर्व जैसे देशों में बिकते हैं। साथ ही नाइजीरिया, कैमरून, घाना, इथियोपिया, केन्या, आइवरी कोस्ट, नेपाल और मेक्सिको जैसे देशों में कंपनी के अपने मैन्युफैक्चरिंग प्लांट भी मौजूद हैं।

लेखक की राय: क्या यह IPO वाकई गेम-चेंजर साबित होगा?

अगर बाजार के नजरिए से देखा जाए, तो Parle Products का यह कदम काफी दिलचस्प है। एक ऐसी कंपनी जो दशकों से प्राइवेट रहकर काम करती आई है और हमेशा लिस्टिंग से दूरी बनाती रही है, अब अगर सच में IPO लाती है, तो यह FMCG सेक्टर के लिए बड़ी खबर होगी। मेरी नजर में इसके तीन बड़े पहलू ध्यान देने लायक हैं।

पहला, टाइमिंग। कंपनी का मुनाफा बीते साल 39% तक गिरा है, जबकि रेवेन्यू में सिर्फ मामूली बढ़त हुई है। ऐसे में सवाल उठना लाजमी है कि क्या यह IPO ग्रोथ के भरोसे लाया जा रहा है या बढ़ती प्रतिस्पर्धा और घटते मार्जिन की भरपाई के लिए पूंजी जुटाने की कोशिश है। निवेशकों को इस पहलू पर जरूर गौर करना चाहिए, न कि सिर्फ ब्रांड की लोकप्रियता देखकर फैसला लेना चाहिए।

दूसरा, भरोसा और ब्रांड वैल्यू। Parle-G जैसा ब्रांड जो हर भारतीय घर से जुड़ा है, उसकी अपनी एक भावनात्मक अपील है, जो बैलेंस शीट के आंकड़ों से कहीं बड़ी होती है। यही वजह है कि भले ही मुनाफा घटा हो, फिर भी कंपनी की वैल्यूएशन 1 लाख करोड़ रुपये के आसपास आंकी जा रही है। ऐसे मामलों में ब्रांड की ताकत अक्सर छोटी-मोटी वित्तीय कमजोरियों पर भारी पड़ जाती है।

तीसरा, यह अभी सिर्फ शुरुआती स्टेज की बात है। जिस तरह से कंपनी ने पहले भी कई बार लिस्टिंग की अटकलों को खारिज किया है, उससे यह मानना जल्दबाजी होगी कि IPO जरूर आएगा। बेहतर यही होगा कि पाठक और निवेशक इसे “संभावना” के तौर पर देखें, न कि तय बात मानकर आगे की योजना बनाएं। जब तक कंपनी या SEBI की तरफ से आधिकारिक फाइलिंग नहीं आती, तब तक स्थिति साफ नहीं मानी जा सकती।

कुल मिलाकर, यह खबर भरोसेमंद सूत्रों पर आधारित जरूर है, लेकिन अंतिम फैसला पूरी तरह कंपनी और बाजार की स्थिति पर निर्भर करेगा।

अगर आपको इस आर्टिकल से जुड़ा कोई सवाल या सुझाव है तो ‘[email protected]’ पर हमें मेल कर सकते हैं।

Disclaimer-  यह आर्टिकल सिर्फ एज्युकेशन एवं जानकारी के लिये लिखा हैं। हम कोई सेबी रजिस्टरी एडवायजरी नहीं हैं। हम कोई भी निवेश करने की सलाह नहीं देते हैं। मार्केट में निवेश जोखिमभरा हो सकता हैं। कृपया कोई भी निवेश करने से पहले आप अपने वित्तीय सलाहकार की राय अवश्य करें।

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