पुराना Gold बेच रहे हैं लोग, 90 दिन 50,000 किलो सोना बेचा गया, सराफा बाजार में यह तूफान कहाँ से आया? | Indian Households Selling Old Gold

By Nishant Patil

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Indian Households Selling Old Gold: हमारे भारत देश में सोना एकमात्र आभुषण नहीं है यह आनेवाले समय में सबसे भरोसेमंद साथी माना जाता है। अगर भारतीय हाउसहोल्ड की बात करें तो निवेश में उनको सबसे ज्यादा किसी पर भरोसा होगा तो वो है सोना। लेकिन इस समय सराफा बाजार में एक अलगसा माहोल देखने को मिल रहा हैं। कुछ दिनों पहले सोने की किंमते आसमान छु रही थी लेकिन अब लोगों को मार्केट क्रैश का डर सता रहा हैं। आम लोग अब अपने घरों और लाॅकर का सोना निकाल रहे हैं और उनको ज्वेलर्स के पास जाकर बेच कर उसके बदले कैश ले रहे हैं। 

अगर एक रिपोर्ट की मानें तो इस तिमाही में भारतीयों ने 50 टन ( लगभग 50,000 किलोग्राम) पुराना सोना बेचकर बंपर प्रोफिट कमाया हैं।

गहना नहीं सीधे कैश ले रहे हैं लोग

बड़े बड़े ज्वेलरी सराफ व्यापारीयों का इसपर कहना है की लोग का हर साल ऐसा देखा जाता है की लोग शादी ब्याह और त्योहारों के सीज़न में अपना पुराना ज्वेलरी लेकर आते हैं और उससे नया गहना बनवाते हैं। लेकिन इस बार ट्रेड थोड़ा अलग ही नजर आ रहा हैं। इस बार ग्राहक सोना तो बेचने आ रहे हैं लेकिन उसका नया कोई दुसरा गहना नहीं बनवा रहे हैं वो शुद्धता चेक करवा कर सीधे नकद या बैंक ट्रांसफर मांग रहे हैं। 

अगर पिछले साल से तुलना करेंगे तो यह आंकड़ा लगभग 43 फिसदी से अधिक बढ़ चुका हैं।

सोने की कीमतों में गिरावट का डर, आखिर क्यों बेच रहे हैं लोग सोना?

आम लोगों और निवेशकों में यह डर अचानक नहीं आया। इसके पीछे कई ठोस कारण हैं।

सोना अंतरराष्ट्रीय बाजार में अपने अब तक के सबसे ऊँचे स्तर 1.80 लाख रुपए प्रति 10 ग्राम को छूने के बाद अब इस ऊँचाई पर टिक नहीं पा रहा। फिलहाल सोने का भाव 1.40 लाख रुपए के आसपास है। और डर यह है कि आगे चलकर यह 1.20 लाख रुपए तक भी लुढ़क सकता है।

मध्य पूर्व में चल रहे तनाव और दुनिया भर के केंद्रीय बैंकों की बदलती नीतियों को देखते हुए जानकारों का मानना है कि सोने में किसी भी वक्त बड़ी गिरावट आ सकती है।

यही वजह है कि अभी बहुत से लोग सोचने लगे हैं, जितना मुनाफा हाथ में है, उसे अभी ही सुरक्षित कर लो। क्योंकि अगर कीमतें एक बार गिरना शुरू हुईं, तो मुनाफे का यह मौका फिर नहीं मिलेगा।

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बाजार और ज्वेलरी कारोबार पर क्या पड़ेगा असर?

लोग पुराना सोना बाजार में लाकर बेच रहे हैं, जिससे ज्वेलर्स के पास नकदी तो आ रही है। लेकिन नए सोने की खरीदारी लगभग थम सी गई है। शादी का सीजन होने के बावजूद लोग भारी गहने खरीदने से बच रहे हैं। अगर यही हाल रहा, तो बाजार में पुराने सोने की आवक बढ़ती रहेगी और कीमतों पर दबाव और बढ़ सकता है।

मुथूट एक्सिम के CEO केयूर शाह के मुताबिक, लोग अब संगठित और पारदर्शी तरीकों से घर में बेकार पड़ा सोना बेचने में ज्यादा सहज महसूस कर रहे हैं। इससे उन्हें सोने का सही दाम मिलता है और साथ ही देश का गोल्ड इकोसिस्टम भी मजबूत होता है। उनकी कंपनी सीधे ग्राहकों से पुराना सोना खरीदती है, उसे रिफाइन करके 24 कैरेट शुद्ध सोना बनाती है और फिर ज्वेलरी व सिक्का निर्माताओं को सप्लाई करती है। इससे नई माइनिंग पर निर्भरता घटती है।

क्या घटेगा सोने का आयात?

यह बदलाव ऐसे वक्त हो रहा है जब भारत अभी भी बड़े पैमाने पर विदेश से सोना मँगाता है। वित्त वर्ष 2026 में देश ने करीब 72.4 अरब डॉलर का सोना आयात किया। वहीं 2025 में लगभग 125 से 150 टन सोना रिसायकल किया गया। अनुमान है कि 2026 में यह आंकड़ा 200 से 250 टन तक पहुँच सकता है।

भारतीय घरों में करीब 30,000 टन सोना बेकार पड़ा है। इसी को देखते हुए इंडस्ट्री के जानकार मानते हैं कि संगठित रिसायक्लिंग से आयात पर निर्भरता काफी हद तक कम की जा सकती है।

ऑगमॉन्ट ने अपने ‘गोल्ड फॉर ऑल’ नेटवर्क के तहत कई राज्यों में 114 सेंटर खोले हैं, जहाँ ग्राहक अपने सोने का मूल्यांकन करवा सकते हैं और उसे बेच सकते हैं। ऑगमॉन्ट के डायरेक्टर केतन कोठारी का कहना है कि दुनिया में घरों में सबसे ज्यादा सोना भारत में है, फिर भी इसका बड़ा हिस्सा अभी तक इस्तेमाल में नहीं आ रहा।

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Disclaimer-  यह आर्टिकल सिर्फ एज्युकेशन एवं जानकारी के लिये लिखा हैं। हम कोई सेबी रजिस्टरी एडवायजरी नहीं हैं। हम कोई भी निवेश करने की सलाह नहीं देते हैं। मार्केट में निवेश जोखिमभरा हो सकता हैं। कृपया कोई भी निवेश करने से पहले आप अपने वित्तीय सलाहकार की राय अवश्य करें।

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